केंद्रीय जीएसटी गुप्तचर महानिदेशालय (डीजीजीआई), कोल्हापुर क्षेत्रीय इकाई, महाराष्ट्र ने माल या सेवाओं की वास्तविक आपूर्ति के बिना केवल दस्तावेजी लेनदेन दिखाकर लगभग 14.31 करोड़ रुपये के फर्जी 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (आईटीसी) के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता और 'एमएस विमल एंटरप्राइजेज' और एम. विमल एग्रो कंपनी के मालिक समाधान घाड़गे (निवासी पंढरपुर, जिला सोलापुर) को गिरफ्तार कर लिया गया है।
इस करोड़ों के जीएसटी घोटाले में समाधान घाड़गे की संलिप्तता का खुलासा अक्टूबर 2025 में हुआ था। तब से जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) उसकी तलाश में था, लेकिन गिरफ्तारी के डर से आरोपी फरार हो गया था। आखिरकार, कोल्हापुर की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान मिली जानकारी के अनुसार, घाड़गे ने स्वयं 14.31 करोड़ रुपये का फर्जी आयटीसी कर प्राप्त किया और उसका उपयोग किया। इसके अलावा, उसने वास्तव में माल की आपूर्ति किए बिना ही विभिन्न व्यापारियों (लाभार्थियों) को 8.44 करोड़ रुपये का फर्जी कर क्रेडिट अवैध रूप से उपलब्ध कराया। इस पूरी साजिश में मयंक मुकेश पटेल ने उसकी सहायता की थी। मयंक पटेल को सितंबर 2025 में ही डीजीजीआई द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था।
यह ऑपरेशन कोल्हापुर की एक टीम द्वारा पुणे संभागीय इकाई के डीजीजीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाया गया। इस टीम में वरिष्ठ खुफिया अधिकारी सूरज पवार, अभिजीत भिसे और खुफिया अधिकारी सौरभ पवार तथा अतुल कुमार शामिल थे। इस अपराध में अन्य संलिप्त लोगों और घोटाले की गंभीरता का पता लगाने के लिए गहन जांच जारी है।