जीएसटी छापे के दौरान जब्त की गई 1 करोड़ रुपये की राशि जप्ती की कारवाई को मा. उच्च न्यायालय ने किया रद्द - जीएसटी विभाग को ब्याज सहित राशि वापस करने का दिया आदेश

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एक  महत्त्वपूर्ण फैसले में मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने, जीएसटी खुफिया निदेशालय (डीजीजीआई) ने जीएसटी छापे के दौरान जब्त किए गए 1 करोड़ रुपये को "मनमाना और कानून के अधिकार के बिना" करार दिया है। मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 10 मार्च, 2026 के अपने आदेश द्वारा याचिकाकर्ता स्मृति वाघधरे द्वारा दायर रिट याचिका संख्या 839/2025 में जीएसटी विभाग द्वारा जारी किए गए दो जब्ती आदेशों को रद्द कर दिया और  याचिकाकर्ता से जब्त किए गए 1 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया।
    मा.बॉम्बे हाई कोर्ट की मा. खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) के अधिकारियों ने धन जब्त करने से पहले जीएसटी अधिनियम के तहत वैधानिक आवश्यकताओं का पालन नहीं किया। मा. पीठ ने उस समय आश्चर्य व्यक्त किया जब सरकारी अभियोजक ने अदालत को सूचित किया कि जब्त की गई नकदी को आगे की कार्रवाई के लिए आयकर विभाग को सौंप दिया गया है।
       याचिकाकर्ता स्मृति वाघधारे ने 27 और 28 जून, 2023 को जारी किए गए जीएसटी आईएनएस-02 फॉर्म में जब्ती आदेशों को चुनौती दी थी। मा. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जीएसटी विभाग को जीएसटी अधिनियम के तहत नकदी जब्त करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और आदेश दिया कि उक्त राशि ब्याज सहित दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को वापस कर दी जाए।