आयकर विभाग से प्राप्त सूचना (आईटीआर/फॉर्म 26एएस) और अपीलकर्ता द्वारा वर्ष 2015-16 के लिए दाखिल किए गए एसटी-3 रिटर्न में घोषित कुल मूल्य की तुलना करने पर, विभाग ने पाया कि कर योग्य मूल्य पर सेवा कर का भुगतान नही किया गया था। तदनुसार, 05.10.2020 को सेवा कर की मांग करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। मूल न्याय निर्णायक अधिकारी, सहायक आयुक्त, सीजीएसटी और सी.एक्स. ने इस मांग की पुष्टि की। अपील में भी आयुक्त (अपील) ने मूल निर्णय को बरकरार रखा।
अपनी दलीलें पेश करते हुए, अपीलकर्ता के वकील ने 'आईटीआर बनाम एसटीआर-3 रिटर्न' का मिलान विवरण प्रस्तुत किया। हालांकि, कनिष्ठ अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और सेवा कर की मांग को बरकरार रखा।
इस पर मा. न्यायाधिकरण ने पाया कि यह मांग केवल आयकर रिटर्न और एसटी-3 रिटर्न के बीच के अंतर के आधार पर की गई है, जबकि उस वर्ष के दौरान प्रदान की गई, या प्राप्त मानी गई सेवाओं की प्रकृति का कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया है। मा. न्यायाधिकरण ने स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता पर जोर देते हुए मे. नानू शोम एंड कंपनी बनाम आयुक्त, सीजीएसटी के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया।
मा. न्यायाधिकरण ने माना कि आयकर रिटर्न/फॉर्म 26AS और ST-3 रिटर्न के मूल्यों के अंतर के आधार पर निर्धारित मांग कानूनन मान्य नहीं है। राजस्व विभाग स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा है। फॉर्म 26AS और ST-3 रिटर्न के आधार पर भी यह नहीं पाया गया है कि राजस्व विभाग ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया हो जिससे यह सिद्ध हो कि अपीलकर्ता ने सेवा कर से बचने के उद्देश्य से कोई जानकारी छिपाई है या जानबूझकर गलत जानकारी दी है। इस प्रकार, सूचना छिपाने का आरोप बिना किसी ठोस साक्ष्य के लगाया गया है। ऐसी स्थिति में, इस मामले में कारण दिखाओ सूचना जारी करने के लिए विस्तार अवधि लागू करने की शर्तें पूरी नहीं हुई हैं। तदनुसार, इस मामले में अपीलकर्ता के विरुद्ध विस्तारित और पुष्टि की गई मांग को रद्द किया जाना चाहिए।
तदनुसार, जारी किया गया मूल कारण बताओ नोटिस और उसके तहत पुष्टि की गई सेवा कर की मांग को योग्यता के आधार पर और समय सीमा समाप्त होने के कारण रद्द कर दिया गया और याचिकाकर्ता की अपील स्वीकार कर ली गई।