उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में दरों के सामंजस्य पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जबकि अगली बैठक में प्रक्रिया सुधारों पर चर्चा हो सकती है। उन्होंने उद्योग जगत को जीएसटी ढांचे में मौजूद विशिष्ट खामियों पर अपने सुझाव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया।
क्या ई-इनवॉइसिंग को कंपोजिशन स्कीम डीलरों सहित सभी करदाताओं तक विस्तारित करने और आईटीसी प्रावधानों को सुव्यवस्थित करने जैसे उपाय "जीएसटी 3.0" का हिस्सा हो सकते हैं, इस सवाल के जवाब में मा. सीतारमण ने कहा कि कि 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में 'जीएसटी 2.0' के तहत प्रक्रियात्मक सुधारों पर चर्चा हो सकती है, जिसमें ई-इनवॉइसिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) नियमों से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
श्रीमती सीतारमण ने कर विशेषज्ञों, उद्योग संघों और शोधकर्ताओं से अपील की कि वे केवल कर दरों में कमी, छूट और रियायतें प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि कर प्रणाली के लिए अनुपयोगी प्रावधानों की पहचान करके साक्ष्य-आधारित कर नीति परिवर्तन में सक्रिय रूप से योगदान दें। उन्होंने कहा, "परामर्श केवल सभी को अपनी राय व्यक्त करने का अवसर देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह साक्ष्य, अनुभवों और विचारों पर ईमानदारी से विचार करने की प्रक्रिया होनी चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "भले ही उद्योग संघ वर्तमान में कुछ प्रावधानों से लाभान्वित हो रहे हों, उन्हें उन प्रावधानों को इंगित करने के लिए तैयार रहना चाहिए जिन्हें हटाया जाना चाहिए।"
उन्होंने स्वतंत्र कर अनुसंधान संस्थान आईटीआरएएफ से, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कराधान पर शोध और विश्लेषण करना तथा नीति निर्माताओं को सिफारिशें देना है, अपनी पहचान को और मजबूत करने तथा भारत में कर नीति अनुसंधान और विश्लेषण के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में उभरने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है जो अर्थशास्त्रियों, कर वकीलों, चार्टर्ड अकाउंटेंटों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के पेशेवरों को एक साथ ला सकें और सार्वजनिक नीति प्रक्रिया में उनके कार्यों को अधिक प्रासंगिक बना सकें।