करण जौहर को बड़ी राहत - धर्मा प्रोडक्शन ग्रुप की फिल्म लाइसेंस शुल्क पर जीएसटी लगाने की मांग माननीय उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी।

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        मा.बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 सितंबर को अपने फैसले में कहा कि फिल्म के निर्माता और मूल कॉपीराइट धारक द्वारा कॉपीराइट का लाइसेंस देना, चाहे वह डिजिटल लिंक के माध्यम से हो या हार्ड डिस्क के माध्यम से, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम के तहत सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर नहीं माना जाएगा। मा. बॉम्बे हाई कोर्ट ने करण जौहर की दो प्रोडक्शन कंपनियों पर लगाए गए लगभग 80 करोड़ रुपये के  कर मांग, ब्याज और जुर्माने को रद्द कर दिया है।
        धर्मा कंपनी के वरिष्ठ वकील का तर्क था कि विवादित आदेशों में मूल त्रुटि "डिजिटल सामग्री" को "सॉफ्टवेयर" के रूप में मानना था और इसका कोई कानूनी आधार नहीं था। उन्होंने सिनेमाई फिल्मों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्थानांतरित किया था। कुछ फिल्में हार्ड डिस्क के रूप में भेजी गई थीं। धर्मा कंपनी ने तर्क दिया कि इस स्थानांतरण के दौरान वितरक को कोई सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं कराया गया था।
        मा. उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया, "चाहे सामग्री भौतिक रूप से (एन्क्रिप्टेड हार्ड डिस्क) या इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजी जाए, वितरण का तरीका वर्गीकरण निर्धारित नहीं कर सकता, जो आपूर्ति की मूल प्रकृति पर निर्भर होना चाहिए।"